longesthamd
PANDIT MUSTAFA Chairman of Quran Literacy Program Foundation, Delhi (INDIA)is a Hindi Urdu Poet and Journalist engaged in writing historical project in Islamic History to write LONGEST HAMD/SUFI SONG of 10000 verses. Based on the teaching and inspiration of Quran this project will be completed in 2015-Inshallah. Till today 13 volumes comprising 7000 verses are completed.Please visit- www.panditmustafa.com
गुरुवार, 29 मार्च 2012
शुक्रवार, 2 मार्च 2012
गुरुवार, 5 मई 2011
THE PROJECT TO WRITE HAMD OF 10000 VERSES-
ISHWAR PRERNA (IN HINDI)
(Started on 6th April, 2008)
Statuary Warning- Use of this song/hamd commercially or otherwise will be violation of Indian Law of copy right act. Please seek permission from author Pandit Mustafa Arif before using the material published on this blog site.
मंगलवार, 3 मई 2011
BURHAN - 52 SELECTED VERSES OF 10000 VERSES HAMD
दाऊदी बोहरा समाज इस वर्ष धर्मगुरु हिज़ होलीनेस डॉक्टर सैयेदना मुहम्मद बुरहानुद्दीन साहब (त०ऊ०स ) की १०० वी सालगिरह मना रहा है. कलामे पाक की शिक्षा से प्रेरित होकर मेरा हिंदी में १०००० पदों की हम्द (ईश स्तुति ) लिखने का काम अल्लाहताला की मेहरबानी और करम से और सैयेदना साहब की दुआओ से सफलता पूर्वक जारी है , इंशाल्लाह यह प्रोजेक्ट २०१५ तक पूरा हो जायेगा. अब तक लिखे गए ३३४८ पदों में से प्रतीक स्वरुप ५२ पदों को यहाँ पहली मर्तबा प्रकाशित किया जा रहा है. सैयेदना साहब की १०० वी सालगिरह के उपलक्ष में ५२ पदों के इस संकलन का शीर्षक " बुरहान " रखा गया है.. अल्ल्लाह्ताला सैयेदना साहब की उम्र को ताक़यामत दराज़ करें- आमीन ! -पंडित मुस्तफा आरिफ
बुरहान
एक है तू एक है
१.
आधार नहीं
अस्तित्व नहीं
आकार नहीं
तेरे बिन ये सृष्टी
ये संसार नहीं
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
२.
अल-अस्मा उल्हुसना
नाम है तेरे सुन्दर सुन्दर
रात दिन जपते है इनको
महकाते है सारा मंज़र
ज़मीन और आसमान में सारे
सुमिरन करते ध्यान लगाकर
तेरे नाम को दिल में बसाना
जायेगा बेकार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
३.
तू ही जीवन देने वाला
तू ही प्राण है हरने वाला
सुख दुःख की नैया को भी
तू ही पार है करने वाला.
जीवन पथ का सच्चा साथी
मार्गदर्शन करनेवाला.
तेरी लीला है नियारी
तेरा कोई पार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
४.
लाचार बीमारों को
तुने ही ईसा दिया.
हजरते युसूफ को
तुने ही रुतबा दिया.
नूह की कश्ती को
तुने ही किनारा दिया.
मुहम्मद की तदबीरो को भी
जाने दिया बेकार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
५.
नतमस्तक होना सीखल लो
तुम सजदा करने सीख लो उठते बैठते अल्लाह के बन्दों
अल्लाह अल्लाह करना सीख लो .
उसी के नाम पर जीना और
उसी पर मरना सीख लो.
बस एक यही अमल काफी है.
दूजे की दरकार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
६.
हमदो सना गायेजा
तू जौर जौर से गायेजा.
अल्लाह के एहसानों को
इंसानों को बतायें जा.
हर दिल में हर शै में,
अल्लाह ही को बसायेजा.
अल्लाह की इबादत को फिर देखे कोई
कैसे होता तैयार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
७.
कोई पैदा कर न पाया,
कोई रचना रच ना पाया.
अपने ही हाथो से तूने,
सारी दुनिया को बनाया.
सिर्फ कह देता की होजा,
रूप ले लेती है काया.
तू बनाये तू बिगाड़े,
तुझसा रचनाकार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
८.
ये नदीया ये पेड़ पौधे
ये समंदर ये पहाड़.
सब तेरी हस्ती के कायल,
सबको है तुझसे ही प्यार.
ज़र्रे ज़र्रे में समाया
तू ही सबका राजदार.
इनका तेरे सिवा जहाँ में,
कोई जिम्मेदार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
९.
तू नूर है तू रोशनी है.
तू ही हमारी ज़िन्दगी है.
हर शै में तू ही समाया,
तुझसे ही सारी प्रकृति है.
खग विहग चार अचर सभी,
और ये जो सारे आदमी है.
तुझसे ही है ये सलामत,
बिन तेरे उद्धार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
१०.
माँ के पेट से जानता है,
क्या पैदा होने वाला है,
अच्छी तरह भली भाँती तूने,
हमको सांचे में ढला है.
पैदाइश से रोज़े क़ज़ा तक,
तूने ही हमको पाला है.
तू बुज़ुर्ग है बालातर है,
तेरी रहमत का पार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
११.
जान न पाया राज़ कोई,
थक थक चूर हुआ इंसान.
जब भी तेरे हुक्म को ताला,
तुझसे दूर हुआ इंसान.
लौट के तेरे दर पर आया,
जब मजबूर हुआ इंसान.
तुझ पर भरोसा करनेवाला,
जीत ही पाटा हर नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
१२.
अल्लाह जैसा चाहे
जो चाहे हो जाता है.
लेकिन आदमी सोचता क्या है,
और क्या हो जाता है.
उसको कोई मीता न पाए,
जो अल्लाह बनाता है.
तू ही है दाता तू ही विधाता,
तुझसा कोई गफ्फार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
१३.
गेहूं का दाना आम की गुठली,
वैसे तो बेजान है.
अपनी किक्मत से डालता
देखो कैसे जान है.
अंकुरित कर फिर से उनको,
देता हमें निशाँ है.
उसको हाथ है जीना मरना,
उसके बिना संसार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
१४,
चलती चाकी देखकर,
दिया कबीरा रॉय.
दो पाटन के बीच में,
साबुत बचा न कोय.
राह पकड़ तू एक ही,
पायेगा मंजिल तोय.
दो नावों पर चलनेवाला,
होता कुशल सवार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
१५.
क्यु न मांगो तुम उससे ही,
जो सबको शक्ती देता है.
साफ़ हवा पानी देता है,
रोज़ी रोटी देता है.
ख़ुशी ख़ुशी ले लो ओ बन्दों.
वो जब भी जो भी देता है.
मेहरबान है रहमदिल है,
ऐसा कोई दातार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
१६.
इज्ज़त कभी नहीं जाती है,
वहां झोली फैलाने से.
राजा रंक सभी पते है,
उसके आस्ताने से.
वो ही जानता है जो भी देता है,
कहता नहीं ज़माने से.
शौर शराबा करनेवाला
धर्म का ठेकेदार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
१७.
हाथ में बस आज है,
कल का किसको है पता.
थामकर ये पल पकड़ लो,
अगले पल का है किसको पता.
लील जाये मौत आकार,
कौन सा पल किसको है पता.
उसके आने के लिए कोई रुकावट
कोई द्वार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
१८.
उसने हाथो में थाम राखी है,
हम सबके जीवन की डौर,
उसके ही हाथों में निहित है,
सारी दुनिया की बागडौर.
पलक झपकतें हो जायेगा,
चारो तरफ अँधेरा घोर.
रोक सकेगा उसको तुम्हारा
कोई पहरेदार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
१९.
झगड़े और फसाद से हमको.
हरदम नफरत करना है.
मानवता का ध्वज थामकर,
प्रेम सभी से करना है.
एक मात्र सन्देश यही है,
उससे सबको डरना है.
आतंक से बन्दों का तेरे
कोई सरोकार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
२०.
ये कैसा जेहाद है,
ये कैसा इत्तेहाद है.
क़त्ले आम करने वालो ,
ये कैसा शंखनाद है.
क्या तुम्हारे दिलो में,
अब भी अल्लाह आबाद है.
अल्लाह से डरनेवालो के
ऐसे तो किरदार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
२१.
फसाद जमीन पर न फैलाओ
यही हुक्मे इलाही है.
आपस में जुड़ जाने में ही,
अब सबकी भलाई है.
बड़ी खराबी उसकी होगी,
जिनसे नफरत फैलाई है,
ऐसे खुदगरज बन्दों का ,
अल्लाह से सरोकार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
२२.
जो हिंसा से दूर रहे,
वो हिन्दू कहलाता है.
सलामती दें सारे जग को,
इस्लामी हो जाता है.
दुःख कष्टों को हरनेवालो का,
ही ईसा से नाता है.
सर्वशक्तिमान एक ही है,
और किसी में सार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
२३.
न्योता दे रहा है इंसान,
एक ज़हरीले रोग को .
भरम का पागलपन जक्डेगा,
जब अनेको लोग को.
छोड़ना चाहेगे फिर सब,
भौतिकवाद और भोग को .
एक रास्ते के अलावा,
भरम का कोई उपचार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
२४.
अनिश्चय और असमंजस ही,
बाधाएं है सबसे बड़ी.
एक हो उद्धेश्य जिसका,
पाता सफलता हे वही .
एक हो गंतव्य तो,
निश्चित पहुँचता यात्री.
कुशल प्रबंधन का रास्ता है ये,
कोरा सोच विचार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
२५.
भरमजाल से बचना है तो,
अपने दिल में सख्ती करलो.
आज ही संकल्प लेलो,
एक ही की भक्ती करलो.
तथ्यपरक और तर्क संगत भी,
बात यही है दोस्तों.
मन फिर तुम्हारे होगा,
द्वन्द या तकरार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
२६.
हम सुधरेंगे युग सुधरेगा,
बात किसी ने सही कही है.
खुद को सुधरने के अलावा,
राह भी अब शेष नहीं है.
गलतियाँ सुधार के आओ,
बख्शने वाल अल्लाह ही है.
खुद को सुधारे बिन कर सकते,
दुनियां का सुधार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
२७,
कह दो अपने माबुदो से,
वो भी करिश्मा कर दिखाए.
कर दे एक पल में अँधेरा,
रौशनी फिर से उगायें.
चाँद सूरज रात दिन ,
अपनी हिकमत से बनाएं.
मान लेना फिर बात उनकी,
बिलकुल करना इनकार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
२८.
लौट आता है जो उसके पास,
उससे ही करता है प्यार.
बेहिसाब फज़ल अता करता है,
ऐसा है परवरदिगार.
रहमत और बरकत देता है,
कर देता है बेडा पार.
उसस कोई सखी नहीं,
हां ऐसा दिलदार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
२९.
तू ही जानता है कारण,
सुख दुःख के आने जाने का.
तू ही बनाता है मोहताज़ ,
इंसान को दाने दाने का.
लाभ हानी यश अपयश सब,
तेरे हुक्म से आने जाने का.
तेरे पास है सबकी चाबी.
तेरे बिना संसार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
३०.
कामयाबी साथ है उसके ,
जिसको तेरा साथ है.
बस में तेरी चीज़ है सब,
बस में सब हालत है.
तू ही खुशिया देनेवाला,
देता तू ही अपघात है.
हमको तुझसे प्यार है केवल ,
और किसी से प्यार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
३१.
जिस दिन तेरी पेशानी पर,
अल्लाह की छाप आएगी.
सफलता तेरे क़दमों पर,
अपने आप आएगी.
कोई भी ताक़त दुनिया की,
तेरी हस्ती नाप ना पायेगी.
तुझको मीटा सके ऐसा तो,
फिर कोई दमदार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
३२.
एक बार मेरी बात मान लो,
उस पर भरोसा करके देखो.
उसकी कुदरत उसकी खुदाई,
दिल की आँखें खोलकर देखो.
सुख दुःख उसका लेन देन है,
दुआ करो और झेल कर देखो.
फिर देखो जीवन की नैया ,
कैसे होती पार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
३३.
अल्लाह की क़सम खाता हु में,
कुरान एक सच्चाई है.
ये सच है कुरान हमारी,
आँखों की बीनाई है.
उस रब्बुल आलमीन ने जहाँ में,
जो भी चीज़ बनाई है.
नष्ट होना है सबक एक दिन.
क्या ये जीवन का सार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
३४.
क्या सुनाऊ क्या दिखाऊ ,
अल्लाह जे एजाज़ तुम्हे.
कुरान में पढकर सुनाऊ ,
उसकी हिकमत के राज़ तुम्हे.
रोज़ तिलावत में मिलती है,
उसकी ही आवाज़ तुम्हे.
हाँ इबादत करने वालो के सिवा,
देता वो दीदार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
३५.
हमने मांगी रहनुमाई
उसने हमें कुरान दिया.
हमने मांगी उससे बशारत ,
उसने हमें ईमान दिया.
हाथ उठाकर जब भी माँगा,
तुझको ए इंसान दिया.
देता ही जाता है इलाही
थकता बिलकूल यार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
३६.
माहे रमजां में उतारा,
तुने पवित्र कुरान को.
रसूल ने पढकर सुनाया,
साफ़ साफ़ फरमान को.
अब भला हम कैसे भूले,
तेरी शान को रमजान को.
तेरी उम्मत को तेरा
इससे बड़ा उपहार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
३७.
पंजतन का महत्व समझो,
समझो क्या इनके मानी है.
राहे खुदा में पंजतन,
बेशुमार कुर्बानी है.
पंजतन में पौशीदा,
इस्लाम की कहानी है.
पंजतन को थामलो फिर तो,
जन्नत भी दुश्वार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
३८.
अल्लाह ने बख्शी है हमको,
बेशुमार रहमतें.
गिनते गिनते थक जाओगे,
अल्लाह की इनायतें.
शुक्र करते जाओ और,
पड़ते रहो तुम आयतें.
रात दिन तस्बीह करो,
भूलो कभी उपकार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
३९.
तू ने मुझको हम्द बख्शी
ये भी तेरा एजाज़ है.
सबसे बड़ी दौलत
मेरे पास ही तो आज है.
तू ही जानता है पौशीदा,
इसमें जो भी राज़ है.
वरना में शायर ,
या कोई बहुत बड़ा फनकार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
४०.
बख्श दे वो ताक़त मुझको,
बख्श दे वो वलवला.
ताक़यामत चलता रहे,
तेरी इबादत का सिलसिला.
चल पड़ा है तेरे जानिब,
मेरे अल्फाजो का काफिला.
रोक सकेगा कोई यहाँ अब,
मेरी रफ़्तार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
४१.
तेरी महीमा तू ही जाने,
तुने क्यु भेजे शब्दों को.
मेने तो तेरे हुक्म से,
सिर्फ सहेजे शब्दों को.
सारी दुनिया तेरा लोहा मानें,
वो ताक़त दे दे शब्दों को.
आरिफ तुझ पर उसकी कृपा है,
तेरी कलम में वो रफ़्तार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
४२.
अलफ़ाज़ नहीं है ये मेरे,
तेरे नाम के अनगिन मोती है.
अंधकार को जड़ से मिटा दे,
ऐसी अद्भुत ज्योती है.
पत्थर दिल को मॉम बनादे,
ऐसी इनमें इनमे शक्ति है.
बेशुमार है इनकी ताक़त,
जिनका कोई शुमार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
४३.
या इलाही मेरे अल्फाजो को,
ताक़त बख्श दे.
बख्श दे जज्बें इलाही ,
और खिदमत बख्श दे.
रात दिन तस्बीह करू,
ऐसी आदत बख्श दे.
जाँ न्योछावर तुझपे करना भी,
मुझे दुश्वार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
४४.
अहद है मेरा ज़िन्दगी भर,
तुझ पर हम्द लिखना है.
तेरी महीमा बतानी है,
तेरे ही शब्द लिखना है.
तू ही बताता है मुझको,
क्या कैसे और कब लिखना है?
वरना मेरे पास तो ,
शब्दों का भी भण्डार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
४५.
कह दे सब अल्लाहो-अकबर ,
मुहम्मद से शरफ हांसिल करे.
हम्द गाएं की शोहरत हम,
हर तरफ हांसिल करें.
हम्द में अल्फाज़ "आरिफ"
बाअदब हांसिल करे.
सारी दुनिया कह उठे तेरा,
मुहम्मद सा जानकार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
४६.
अता-अत के लिए उसके पास,
क्या फरिश्तें कम न थें.
क्या उसकी ज़मीन पर ,
मुहम्मद के सिवा आदम न थे.
क्या दानिश्वर न थे,
क्या साहबें कलम न थे.
लेकिन एक भी हीरा था ज़मीं पर,
मुहमम्द सा चमकदार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
४७.
तुने यहाँ पर नूह को भेजा,
तुने ही भेजा मूसा को.
तुने ही तौफिक अता की,
मरयम के बेटे ईसा को.
तेरी महीमा बताने आये,
कईं पैग़म्बर दुनिया को.
तेरी रह पर चले बिना,
होगा ये बेडा पार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
४८.
मेर राह पर चलता चल.
मेरी इबादत करता चल.
और मुझसे ही डरता चल,
मुझसे से ही मुहब्बत करता चल.
अल्लाह के फरमान है ये,
तू मुझसे उल्फत करता चल.
परेशानीयों में फिर कभी,
तू होगा गिरफ्तार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
४९.
अल्लाह से डरने वालो से,
सारी दुनिया डरती है.
पढ़ लो वो कुरान की आयात,
जो ये वादा करती है.
तुम अल्लाह से डरते रहो,
तुमसे प्यार करेगी धरती ये .
जन्नत के सिवा तुम्हारा,
होगा कोई घरबार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
५०.
काली कमली वाले बाबा,
मुझको है अल्लाह ने बख्शी.
मुझको है अल्लाह ने बख्शी,
कुव्वत हम्द लिखे की.
देखले ये इन्तेहा है,
मुझपे तो उसके करम की.
ताकयामत उसका एहसान,
सकता में उतार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
५१.
सच्चे दिल से सोचो लोगो,
सोचो वो क्या मांगता है.
मांगता है सच्ची मोहब्बत,
और इबादत मांगता है.
वो मेहरबां वो रहमदिल ,
तुमसे अकीदत मांगता है.
इसके बदले क्या तुम्हे वो,
सौंपता संसार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
५२.
अल्लाह अल्लाह नाम लिए जा,
अल्लाह ही बचाएगा.
अल्ल्लाह अल्लाह और अल्लाह ही,
नैय्या पार लगाएगा.
अल्लाह का तू थाम ले दामन,
वही हिफाज़त पायेगा.
अल्लाह के दरबार से बढकर,
और कोई दरबार नहीं.
एक है तू एक है.
ए अल्लाह
ए मालिक
ए ईश्वर
तेरा कोई पार नहीं
एक है तू एक है.
वैधानीक चेतावनी - उपरोक्त गीत / ईश स्तुति / हम्द का व्यावसयिक व अन्य उपयोग भारतीय कॉपी राईट एक्ट का उल्लंधन है. कृप्या इस ब्लॉग साईट में प्रकाशित सामग्री का उपयोग करने से पूर्व लेखक पंडित मुस्तफा आरिफ से अनुमती अवश्य प्राप्त करले,
.
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